दिल्ली में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चुनाव आयोग ने एक बड़ी कवायद शुरू की है, जिसे Delhi SIR Voter List यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के नाम से जाना जाता है। इस प्रक्रिया के तहत दिल्ली के करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह सटीक और अद्यतन हो सके।
SIR क्या है और इसका मकसद क्या है
Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर की जाने वाली एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें सामान्य पुनरीक्षण से अलग, बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मौजूदा मतदाताओं की जानकारी को दोबारा जांचते हैं, गलत या पुरानी एंट्री हटाते हैं और नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ते हैं। Delhi SIR Voter List का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से छूटे नहीं, और साथ ही सूची से अपात्र, मृत या डुप्लिकेट नामों को हटाया जा सके।
चुनाव आयोग ने साल 2002 में हुए आखिरी विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची को दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है, ताकि लोग अपने पुराने रिकॉर्ड से मिलान कर सकें।
Delhi SIR Voter List की समय-सारणी
Delhi SIR Voter List प्रक्रिया एक तय समय-सारणी के अनुसार चरणबद्ध तरीके से चलाई जा रही है:
- घर-घर सत्यापन (BLO विजिट): 30 जून से 29 जुलाई तक
- मतदान केंद्रों का युक्तिकरण: 29 जुलाई तक
- प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची का प्रकाशन: 5 अगस्त
- दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि: 5 अगस्त से 4 सितंबर तक
- नोटिस चरण और दावों का निपटारा: 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक
- अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 7 अक्टूबर
इस पूरी कवायद के दौरान 13,000 से अधिक बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटा रहे हैं और उन्हें एन्यूमरेशन फॉर्म भरने में मदद कर रहे हैं।
किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है
Delhi SIR Voter List प्रक्रिया के दौरान बीएलओ आमतौर पर निम्न में से कोई भी दस्तावेज मांग सकते हैं:
- जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र
- भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र
अगर किसी मतदाता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में मौजूद है, तो उसे अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत आमतौर पर नहीं पड़ती। वहीं 2002 के बाद दिल्ली आकर बसे लोगों के लिए पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज देना जरूरी हो सकता है।
अपना नाम मतदाता सूची में कैसे जांचें
मतदाता Delhi SIR Voter List में अपना नाम इन तरीकों से जांच सकते हैं:
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट ceodelhi.gov.in पर जाकर
- चुनाव आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाकर पुरानी मतदाता सूची (2002-2004) से मिलान करके
- संबंधित बूथ लेवल अधिकारी या वोटर सेंटर पर जाकर प्रारूप मतदाता सूची देखकर
- वोटर सेंटर पर भौतिक रूप से चिपकाई गई सूची के माध्यम से
अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद यह जानकारी सीईओ दिल्ली की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
किन कारणों से नाम हट सकता है
Delhi SIR Voter List के दौरान कुछ स्थितियों में मतदाता का नाम सूची से हटाया जा सकता है, जैसे:
- मतदाता की मृत्यु हो चुकी हो और नाम अब तक न हटाया गया हो
- एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज हो (डुप्लिकेट एंट्री)
- मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुका हो
- सूची में किसी विदेशी नागरिक का नाम गलती से दर्ज हो गया हो
सर्वोच्च न्यायालय का रुख
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की वैधानिकता को बरकरार रखते हुए इसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुरूप बताया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है, और SIR कराने का फैसला आयोग के कानूनी अधिकार क्षेत्र में ही आता है।
हाल की अहम अपडेट
सितंबर 2026 के अंत में चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को लेकर कुछ बदलाव भी किए हैं। आयोग के भीतर मतदाता पंजीकरण से जुड़े कुछ पहलुओं पर असहमति की खबरों के बाद, आयोग ने अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि जिन मतदाताओं के दस्तावेजों में कमी या गड़बड़ी है, उनसे दस्तावेज खुद जाकर एकत्र किए जाएं। साथ ही, जो मतदाता पहले पुनरीक्षण में छूट गए थे, वे “सतत संशोधन” (continuous modification) की प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वा सकेंगे। इसके अलावा एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई गई है, जो मतदाता पंजीकरण से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा करेगी।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि SIR प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की राय अलग-अलग रही है — कुछ इसे मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने का जरूरी कदम मानते हैं, तो कुछ इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।
निष्कर्ष
Delhi SIR Voter List प्रक्रिया दिल्ली के मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसमें वे अपनी जानकारी सही करा सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज हो। हर मतदाता को चाहिए कि वह तय समय-सीमा के भीतर अपना नाम जांचे, जरूरी दस्तावेज तैयार रखे और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत दावा या आपत्ति दर्ज कराए, ताकि 7 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम सूची में उसका नाम सही रूप में शामिल रहे।