SIR Form भरना जरूरी है या नहीं? जानिए पूरी सच्चाई

देशभर में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर लाखों मतदाताओं के मन में एक ही सवाल है क्या SIR Form भरना अनिवार्य है, या इसे नज़रअंदाज़ भी किया जा सकता है? इस लेख में हम इस सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब देने के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाएंगे।

SIR क्या है

Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान है, जिसके तहत देशभर की मतदाता सूचियों की गहराई से जांच और अद्यतन किया जा रहा है। इसका मकसद है कि सूची में कोई भी पात्र नागरिक छूटे नहीं, और साथ ही मृत, स्थानांतरित हो चुके या एक से ज्यादा जगह दर्ज मतदाताओं के नाम हटाए जाएं। यह प्रक्रिया कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से चलाई जा रही है, जिनमें छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं।

क्या SIR Form भरना अनिवार्य है

सीधे शब्दों में कहें तो हां, SIR Form भरना और समय पर जमा करना अनिवार्य है। सामान्य वार्षिक संशोधन (Special Summary Revision) में सिर्फ वे मतदाता हिस्सा लेते हैं जिन्हें नाम जुड़वाना, हटवाना या सुधार करवाना होता है। लेकिन SIR में हर एक मतदाता को दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, चाहे उसका नाम पहले से सूची में क्यों न हो।

अगर कोई मतदाता तय समय सीमा के भीतर अपना enumeration form नहीं भरता या Booth Level Officer (BLO) को वापस जमा नहीं करता, तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। कई राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने इस बारे में सार्वजनिक रूप से चेतावनी भी जारी की है। उदाहरण के तौर पर तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ कहा है कि फॉर्म जमा न करने पर मतदाता का नाम सूची से हट सकता है।

किन दस्तावेज़ों की जरूरत पड़ती है

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि Form 6 या Form 8 के साथ एक अतिरिक्त Declaration Form (Annexure D) भरने वाले मतदाताओं को अलग से कोई और दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत नहीं है। यह प्रावधान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जोड़ा गया है।

फॉर्म भरते समय मतदाताओं की स्थिति अलग-अलग हो सकती है:

  • जिनका नाम पिछली SIR सूची (जैसे 2002 या 2003 की सूची) में पहले से दर्ज है, उन्हें सिर्फ बुनियादी जानकारी भरनी होती है।
  • जिनका नाम 2025 की मौजूदा सूची में है लेकिन पुरानी सूची में नहीं, उन्हें अपने माता-पिता या रिश्तेदार का पुराना EPIC नंबर देना होता है।
  • जिन्हें दस्तावेज़ी सत्यापन की जरूरत होगी, उन्हें आगे नोटिस के जरिए सूचित किया जाएगा और तभी संबंधित दस्तावेज़ जमा करने होंगे।

Form भरने के तरीके

SIR Form भरने के मुख्य रूप से दो तरीके हैं:

  1. ऑफलाइन तरीका – BLO घर-घर जाकर पहले से आंशिक रूप से भरा हुआ फॉर्म देते हैं, जिसे मतदाता भरकर वापस उन्हीं को सौंप देता है।
  2. ऑनलाइन तरीका – मतदाता चुनाव आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in या ECINET ऐप के जरिए भी अपना फॉर्म ऑनलाइन भर सकते हैं। इसके लिए EPIC नंबर डालकर OTP वेरिफिकेशन के बाद पूरी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

समय सीमा चूक जाने पर क्या करें

अगर तय तारीख के भीतर फॉर्म जमा नहीं हो पाया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कई राज्यों में चुनाव आयोग ने “दावे और आपत्ति” (Claims and Objections) चरण के दौरान अतिरिक्त समय दिया है, जिसमें जरूरी दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म बाद में भी जमा किया जा सकता है। जैसे राजस्थान में एनुमरेशन चरण की तय तारीख निकलने के बाद भी लोगों को दावे और आपत्ति की अवधि में दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म जमा करने का मौका दिया गया।

SIR को लेकर विवाद

यह प्रक्रिया पूरी तरह विवादों से अछूती नहीं रही है। कुछ राजनीतिक दलों और याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के इस अभियान को चलाने के अधिकार पर ही सवाल उठाए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस प्रक्रिया को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुरूप बता चुका है और चुनाव आयोग के इस कदम को उसके संवैधानिक दायित्व का हिस्सा माना है।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • SIR Form भरना अनिवार्य है; न भरने पर नाम सूची से हट सकता है।
  • Form 6/8 के साथ Declaration Form भरने पर अतिरिक्त दस्तावेज़ की जरूरत नहीं।
  • फॉर्म ऑफलाइन (BLO के जरिए) और ऑनलाइन (ECI पोर्टल/ऐप) दोनों तरीकों से भरा जा सकता है।
  • समय सीमा चूकने पर भी दावे-आपत्ति चरण में मौका मिलता है।
  • प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट से कानूनी मान्यता मिल चुकी है।

निष्कर्ष

अगर आप मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखना चाहते हैं, तो SIR Form को गंभीरता से लें और तय समय के भीतर इसे भरकर संबंधित BLO को जमा करें या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सबमिट करें। यह फॉर्म सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आपके मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखने का एक जरूरी कदम है।

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